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कार से हथियारों व कारतूसों का जखीरा बरामद पति-पत्नी व देवर के खिलाफ मामला दर्ज

जिन्हें एसटीएफ ने काशीपुर कोतवाली में ले जाकर दाखिल कराया गया। मामले में जांच के दौरान पति-पत्नी व देवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

देहरादून। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) उत्तराखण्ड ने राज्य में बाहरी राज्यों से स्थानान्तरित होकर आए शस्त्र लाइसेंसों की वैधता एवं सत्यता की जांच के उपरान्त 4 जून को ऊधमसिंह नगर की काशीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मुकदमें की विवेचना के क्रम में बीती देर रात उत्तराखण्ड एसटीएफ व ऊधमसिंह नगर पुलिस ने ज्वाइंट ऑप्रेशन में कार्यवाही करते हुए काशीपुर क्षेत्र से 4 हथियार व 237 कारतूस एक स्विफ्ट कार से बरामद किये गये। जिन्हें एसटीएफ ने काशीपुर कोतवाली में ले जाकर दाखिल कराया गया। मामले में जांच के दौरान पति-पत्नी व देवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि बरामद शस्त्र, कारतूस, कूटरचित लाइसेंस एवं वाहन मुकदमा उपरोक्त में नामजद आरोपी सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल पुत्र राकेश अग्रवाल निवासी काशीपुर व दीप्ति अग्रवाल पत्नी सौरभ अग्रवाल निवासी काशीपुर के हैं। जिस सम्बन्ध में अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। बताया कि एसटीएफ. ने राज्य में फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले की जांच की जा रही है और एसटीएफ ने राज्य में इस सम्बन्ध में विभिन्न जनपदो में 3 मुकदमें दर्ज कर संलिप्त 5 आरोपियों को जेल भेजा गया है तथा अब तक 5 अवैध शस्त्र व फर्जी लाइसेंस बरामद किये जा चुके हैं।
एसएसपी ने बताया कि कल रात्रि एसटीएफ को काशीपुर के कटोराताल क्षेत्र में एक स्विफ्ट कार में भारी मात्रा में अवैध हथियार होने का गोपनीय इनपुट प्राप्त हुआ था जिस पर गठित टीम को निर्देशित किया गया था। टीम ने स्थानीय पुलिस को साथ लेते हुए रात्रि में कार्यवाही करते हुए इस स्विफ्ट कार को कब्जे में लेते हुए उसके अन्दर से 4 अवैध हथियार व 237 कारतूस, 4 मैंगजीन व 7 कूटरचित लाइसेंस बरामद किये गये।
इसके अतिरिक्त राज्य में बाहरी राज्यों से स्थानान्तरित होकर आए हजारों शस्त्र लाइसेंसों एवं उनके धारकों का सत्यापन जारी है। जांच के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आगे भी लगातार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति एवं कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं तथा ऐसे मामलों में उत्तराखण्ड पुलिस “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।

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