
मुख्यमंत्री ने की एकल महिला स्वरोजगार योजना के दूसरे चरण की शुरुआत
दूसरे चरण में 488 महिलाओं को 2.76 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की
राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता एकल महिलाओं को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना
देहरादून, 22 जुलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने डीबीटी के माध्यम से कुल 488 महिला लाभार्थियों के खातों में 2 करोड़ 76 लाख 16 हजार 875 रुपये की सहायता राशि हस्तांतरित की।
योजना के दूसरे चरण के तहत 212 नई महिला लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपये प्रदान किए गए, जबकि प्रथम चरण की 276 महिलाओं को द्वितीय किश्त के रूप में 1 करोड़ 20 लाख 76 हजार 875 रुपये की सहायता राशि जारी की गई। इससे पहले 10 फरवरी 2026 को योजना के प्रथम चरण में 484 महिलाओं को 3 करोड़ 45 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। महिलाओं के सशक्त होने से परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत बनता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता एकल महिलाओं को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत एकल, निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिलाओं, एसिड अटैक पीड़िताओं, अन्य आपराधिक घटनाओं से प्रभावित महिलाओं तथा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वरोजगार के लिए अधिकतम दो लाख रुपये तक की परियोजना स्वीकृत की जाती है। इसमें 75 प्रतिशत तक अनुदान राज्य सरकार देती है, ताकि लाभार्थी अपने निवास क्षेत्र में ही स्वरोजगार स्थापित कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। महिला आरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी अभियान और तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त करने जैसे कदमों ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ रही है। वर्तमान में प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, जबकि 2.65 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। सरकार महिलाओं के उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन को भी बढ़ावा दे रही है।
उत्तराखण्ड में 2 लाख 65 हजार से ज्यादा महिलाएं बनीं लखपति दीदी
वर्तमान में प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। 7 हजार से ज्यादा ग्राम संगठन और 500 से ज्यादा क्लस्टर संगठन महिलाओं के सामूहिक नेतृत्व को सशक्त बना रहे हैं। वहीं, 2 लाख 65 हजार से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राज्य सरकार महिलाओं के हाथों से तैयार किए जा रहे उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए भी सुदृढ़ व्यवस्था विकसित कर रही है।
इस योजना के माध्यम से एकल महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें। सरकार महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, विपणन और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने महिलाओं से इसका पूरा लाभ उठाकर अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनने का आह्वान किया।



