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आपसी संघर्ष से हरिद्वार में मखना हाथी की मौत, वन महकमे में मचा हड़कंप

चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत शव का पोस्टमार्टम कराया गया और नियमानुसार मौके पर ही दफना दिया

हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज स्थित खारा सेक्टर-2 बीट में एक मखना हाथी की मौत से हड़कंप मच गया। वन विभाग के अनुसार हाथियों के आपसी संघर्ष में हाथी की मौत हुई है। सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत शव का पोस्टमार्टम कराया गया और नियमानुसार मौके पर ही दफना दिया गया।
हरिद्वार वन विभाग की श्यामपुर रेंज के रेंज अधिकारी विनय राठी ने बताया कि सुबह खारा यूनिट के वनकर्मी नियमित गश्त कर रहे थे। इसी दौरान कुछ दूरी पर एक हाथी लहूलुहान हालत में पड़ा दिखाई दिया। हाथी को देखकर वन विभाग में हड़कंप मच गया। तत्काल इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही एसडीओ पूनम कैंथोला, रेंज अधिकारी विनय राठी और डॉक्टरों टीम मौके पर पहुंची। एसडीओ पूनम कैंथोला ने अधिकारियों से मामले की जानकारी जुटाई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मृत हाथी मखना था।
अनुमान है कि जंगल में उसका टस्कर हाथी से आपसी संघर्ष हुआ। टस्कर हाथी की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि घायल होने के बाद उस पर बाघ ने भी हमला किया। क्योंकि हाथी के कान के पास तथा शरीर के कई हिस्सों पर बाघ के पंजों के निशान मिले हैं। एसडीओ पूनम कैंथोला ने बताया कि गश्त के दौरान जंगल में हाथी का शव पाया गया था। शव मिलने की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और वन विभाग के दिशा निर्देशों के अनुसार मौके पर ही दफना दिया गया है।
मखना हाथी, उस हाथी को कहा जाता है, जिसके दांत नहीं होते। हालांकि यह हाथी पूरी तरह स्वस्थ होते हैं और आनुवंशिक कारणों से ही इनके दांत नहीं होते हैं। जिस मखना हाथी की श्यामपुर रेंज में मौत हुई है, वो झुंड से अलग रहता था। बताया जा रहा है कि यह मखना हाथी, कई दिनों से जंगल में अकेला झुंड से अलग घूम रहा था। एक टस्कर हाथी से मखना हाथी का आमना सामना हो गया और टस्कर हाथी की टक्कर से वो घायल हो गया।
घायल अवस्था में देख, जंगल में घूम रहे एक बाघ ने भी उस पर हमला कर दिया। हाथी के शरीर पर भी बाघ के पंजों के निशान दिखाई दिए हैं। गौर हो कि दांत वाले हाथी को टस्कर हाथी कहा जाता है। इसी क्षेत्र में एक हथिनी भी वन विभाग के लिए सिरदर्द बनी हुई है। कई दिनों से यह हथिनी झुंड से अलग घूम रही है। वनकर्मियों द्वारा लगातार इसकी निगरानी की जा रही है।

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