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गरीबों को राशन देने की प्रणाली से भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म हो जाएगा: शाह

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से आज डिजिटल इंडिया का विस्तार खाद्य और आपूर्ति की व्यवस्था तक पहुंच रहा है।

गांधीनगर। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि देश डिजिटल प्रणाली अपनाकर गरीबों को सस्ता अनाज देने के क्षेत्र में पदार्पण कर रहा है जिससे गरीबों को राशन देने के तंत्र से भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। अमित शाह ने रविवार को यहां सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) आधारित पारदर्शी, आधुनिक एवं सरल सार्वजनिक वितरण व्यवस्था (पीडीएस) का शुभारंभ कर कहा कि गरीबों को राशन देने की प्रणाली से भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से आज डिजिटल इंडिया का विस्तार खाद्य और आपूर्ति की व्यवस्था तक पहुंच रहा है। पीएम मोदी ने देश के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों को दिया है। भारत में 60 करोड़ लोग ऐसे थे जिनके पूरे परिवार में एक भी बैंक खाता नहीं था, लेकिन उनके नेतृत्व में दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन्स में से आधे भारत में हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश में संपर्क सुविधा के विस्तार से अब डिजिटल तरीके से गरीबों को सीधे अनाज मिलने की व्यवस्था हो जाएगी। जिस प्रकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) ने देश में से घपले-घोटालों को समाप्त कर दिया, उसी प्रकार खाद्य आपूर्ति मंत्रालय का यह कदम आने वाले दिनों में पारदर्शी वितरण प्रणाली सुनिश्चित करेगा। प्रधानमंत्री के मंत्र, ‘ न्यूनतम सरकार, अधिकतम सुशासन को आज एक नए क्षेत्र में धरातल पर उतारने का काम हो रहा है।

अमित शाह ने कहा कि टेक्नोलॉजी और पीएम मोदी जी की गरीबों के प्रति संवेदना का अनूठा संगम यह वितरण प्रणाली सुरक्षित, पारदर्शी तरीके से गरीबों के अधिकार की सुरक्षा का माध्यम बनेगी। आज अन्नपूर्ति मशीन का भी लोकार्पण हुआ है, जो 35 सेकंड में 25 किलो अनाज का वितरण कर रही है। उन्होंने कहा कि तीन-चार साल में ही पूरे देश में यह प्रणाली लागू हो जाएगी। यह अनाज वितरण प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी होगी और इसके लागू होने के बाद देश के हर गरीब को पांच किलो मुफ्त अनाज मिल सकेगा। बेहतर गुणवत्ता, सटीक मात्रा और पारदर्शी वितरण में अन्नपूर्ति मशीन सहायक सिद्ध होगी। धीरे-धीरे कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक हमारे विशाल देश में इस प्रणाली को लागू करना चाहिए।

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