उत्तराखंड

मद्महेश्वर धाम के कपाट खोलने की तिथि में बदलाव की मांग

समिति के सचिव वीरेन्द्र सिंह पंवार ने कहा कि कपाट खुलने की तिथियों में समन्वय स्थापित होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

जिला प्रशासन को भेजा ज्ञापन
रुद्रप्रयाग। पंच कारबारियान हक-हकूकधारी समिति, श्री मद्महेश्वर मंदिर, मद्महेश्वर धाम गौण्डार द्वारा जिलाधिकारी एवं बद्री-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी को ज्ञापन प्रेषित कर द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम के कपाट खोलने की तिथि में परिवर्तन की मांग उठाई गई है।
समिति ने मांग की है कि भविष्य में मद्महेश्वर धाम के कपाट केदारनाथ धाम एवं तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथियों के आसपास ही निर्धारित किए जाएं, जिससे श्रद्धालुओं को पंचकेदार यात्रा में सुविधा मिल सके। समिति के शिवानन्द पंवार ने ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में मद्महेश्वर धाम के कपाट अन्य धामों की तुलना में लगभग एक माह बाद खोले जाते हैं, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। यदि केदारनाथ व तुंगनाथ धाम के साथ ही निकट तिथियों में कपाट खोले जाएं, तो श्रद्धालु एक ही यात्रा क्रम में तीनों धामों के दर्शन कर सकेंगे। इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
समिति के संरक्षक फते सिंह पंवार ने कहा कि पंचकेदार यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसे पूर्ण करने की इच्छा रखते हैं। अलग-अलग तिथियों के कारण कई बार यात्रियों को पुनः यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और आर्थिक भार बढ़ता है। समिति के सचिव वीरेन्द्र सिंह पंवार ने कहा कि कपाट खुलने की तिथियों में समन्वय स्थापित होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पर्यटन सीजन में अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से क्षेत्रीय व्यापार, आवास, परिवहन एवं अन्य सेवाओं को लाभ मिलेगा।
कोषाध्यक्ष दिलवर सिंह पंवार ने जिलाधिकारी एवं मुख्य कार्याधिकारी से अनुरोध किया है कि इस विषय पर संबंधित विभागों, मंदिर समिति एवं धार्मिक विद्वानों के साथ समन्वय स्थापित कर उचित निर्णय लिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें।
वन पंचायत गौण्डार के सरपंच जसपाल सिंह पंवार ने भी प्रशासन से इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे न केवल धार्मिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि मद्महेश्वर घाटी के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

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