उत्तराखंड

केदारनाथ धाम में प्लास्टिक वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण

कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए उसे विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जा रहा है, जिसमें अब तक करीब 15 कैटेगरी निर्धारित की जा चुकी हैं।

ग्रीन यात्रा की दिशा में जिला प्रशासन की बड़ी पहल
बेलिंग मशीन और एमआरएफ सेंटर के जरिए ड्राई वेस्ट मैनेजमेंट को मिली नई मजबूती
स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल तीर्थ यात्रा के लिए प्रशासन के प्रभावी व नवाचारपूर्ण प्रयास
रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में इस वर्ष यात्रा को स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच स्वच्छता बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, लेकिन इस बार प्रशासन ने आधुनिक तकनीक, सुनियोजित रणनीति और जनसहभागिता के माध्यम से इसे एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए हैं।
जिला प्रशासन ने संपूर्ण यात्रा मार्ग से लेकर धाम क्षेत्र तक साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। विशेष रूप से प्लास्टिक एवं अन्य सूखे कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए नगर पंचायत केदारनाथ द्वारा अत्याधुनिक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है। ड्राई वेस्ट के प्रभावी प्रबंधन को लेकर बेलिंग मशीन का उपयोग इस अभियान की प्रमुख विशेषता बनकर उभरा है। इस तकनीक के माध्यम से प्लास्टिक एवं अन्य सूखे कचरे को संपीड़ित कर “बेल्स” के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिससे कचरे के सुरक्षित भंडारण, परिवहन और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया न केवल आसान हुई है, बल्कि अधिक संगठित और टिकाऊ भी बनी है।
नगर पंचायत केदारनाथ के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने जानकारी देते हुए बताया कि धाम क्षेत्र में स्थापित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह सेंटर गत वर्ष हीलिंग हिमालयन फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित किया गया था, जहां सूखे कचरे का वैज्ञानिक ढंग से संकलन, पृथक्करण और पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक नगर पंचायत द्वारा लगभग पांच सौ किलोग्राम सूखे कचरे को प्रोसेस कर बेल्स के रूप में तैयार किया जा चुका है। इन बेल्स के विक्रय से निकाय को लगभग 15 से 20 हजार रुपये की आय होने की संभावना है, जिससे स्वच्छता अभियान को आर्थिक संबल भी प्राप्त हो रहा है। कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए उसे विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जा रहा है, जिसमें अब तक करीब 15 कैटेगरी निर्धारित की जा चुकी हैं। यह प्रणाली न केवल कचरे के प्रभावी निस्तारण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित और परिणामदायी बना रही है। जिला प्रशासन के इन सतत प्रयासों से केदारनाथ धाम क्षेत्र को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत कर रही है, जिसे अन्य तीर्थ स्थलों पर भी अपनाया जा सकता है। प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करें और कचरे को निर्धारित स्थानों पर ही डालें। साथ ही “ग्रीन केदारनाथ, स्वच्छ केदारनाथ” अभियान में सहभागी बनकर इस पावन धाम की गरिमा और प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखने में अपना योगदान दें।

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