उत्तराखंड

तीन दिन बाद फिर गूंजा ‘हर-हर महादेव’, केदारनाथ यात्रा दोबारा शुरू, अलकनंदा का रौद्र रूप 

लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं।

रुद्रप्रयाग में नदी किनारे बस्तियों पर मंडराया खतरा
31 जुलाई को यात्रा शुरू होते ही उमड़ा आस्था का सैलाब, करीब 800 श्रद्धालु रवाना
अलकनंदा खतरे के निशान से ऊपर, घरों और मंदिर तक पहुंचा पानी, प्रशासन हाई अलर्ट पर
रुद्रप्रयाग। तीन दिनों तक लगातार मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण बाधित रही विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ यात्रा शुक्रवार, 31 जुलाई को एक बार फिर शुरू हो गई। सुबह करीब आठ बजे प्रशासन द्वारा यात्रा की अनुमति मिलते ही ष्हर-हर महादेवष् और ष्जय बाबा केदारष् के जयघोषों से पूरी केदारघाटी गूंज उठी। सोनप्रयाग में तीन दिनों से यात्रा शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं के चेहरों पर राहत और उत्साह साफ दिखाई दिया। पहले चरण में करीब 800 श्रद्धालुओं को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच केदारनाथ धाम के लिए रवाना किया गया।
हालांकि यात्रा पुनः शुरू होने के बावजूद खतरा पूरी तरह टला नहीं है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर कई संवेदनशील स्थानों पर अभी भी भूस्खलन से आया मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। राजमार्गों पर जेसीबी मशीनें और संबंधित विभागों की टीमें लगातार मार्ग को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने में जुटी हैं। प्रशासन प्रत्येक यात्री की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए मौसम और मार्ग की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है।
बीते दिन लगातार हो रही भारी बारिश और पहाड़ियों से हो रहे भूस्खलन के चलते प्रशासन ने एहतियातन पूरे दिन यात्रा स्थगित रखी थी। श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग सहित अन्य सुरक्षित स्थानों पर रोका गया, जहां पुलिस, प्रशासन, डीडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने पूरी व्यवस्था संभाली। शुक्रवार सुबह मौसम में आंशिक सुधार और मार्ग की समीक्षा के बाद यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से आगे भेजा गया।
इधर, रुद्रप्रयाग मुख्यालय में अलकनंदा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। नदी का पानी अब तटीय क्षेत्रों में स्थित आवासीय मकानों तक पहुंच चुका है। कई परिवारों ने संभावित खतरे को देखते हुए अपने घर खाली करने शुरू कर दिए हैं।
बेलनी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर तक भी नदी का पानी पहुंच गया है। मंदिर और आसपास के घरों से स्थानीय लोग आवश्यक सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। वहीं वाल्मीकि बस्ती को जोड़ने वाला पुल तेज बहाव में पूरी तरह जलमग्न हो चुका है, जिससे स्थानीय लोगों का संपर्क प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अलकनंदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और नदी का उफान भयावह होता जा रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले सभी लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से नदी के समीप न जाने तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने की अपील की है।
रुमार्ग पर संबंधित विभागों, डीडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की टीमें चौबीसों घंटे तैनात
रुद्रप्रयाग। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि लगातार बारिश के चलते केदारनाथ पैदल मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। मार्ग पर संबंधित विभागों, डीडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की टीमें चौबीसों घंटे तैनात हैं और श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी सुरक्षा के साथ कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। लगातार जारी बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पूरे जनपद में प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो निचले इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें, सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन एवं आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दें। एक ओर तीन दिन बाद फिर से शुरू हुई बाबा केदार की यात्रा ने श्रद्धालुओं के चेहरे पर मुस्कान लौटाई है, वहीं दूसरी ओर अलकनंदा का बढ़ता जलस्तर रुद्रप्रयाग के लिए नई चुनौती बनकर सामने खड़ा है। आस्था और आपदा के बीच जूझ रही केदारघाटी पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

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